Saturday, January 22, 2011

दिवाली पूजा मुहूर्त २०११



२६ अक्टूबर  २०११, दिन - बुधवार 
नक्षत्र - चित्रा दिन  में होगा परन्तु प्रदोष काल के बाद स्वाति नक्षत्र कालीन प्रीती योग तथा तुला राशि में  चन्द्रमा स्थित होगा.
प्रदोष काल - १७. ४२ से २०. १८ तक
विशेष प्रदोष काल - १८.४६ से रात्रि २०.४१ तक
निशीथ काल - २०.१८ से २२.५४ तक
अमृत चौघडिया - २०.५८ से २२.३६ तक
महा निशीथ काल - २२ .५४ से २५.३० तक
इस अवधि में कर्क लग्न २२ .५५ से लेकर २५.१८ तक रहेगा जो की विशेष प्रशस्त रहेगा.

करणीय कार्य -

प्रदोष काल मे मंदिर मे दीप दान , रंगोली और पूजा की पूर्ण तयारी कर लेनी चाहिए. द्वार प़र स्वस्तिक और शुभ लाभ का सिन्दूर से निर्माण भी इसी समय करना चाहिए .

श्री गणेश , श्री महा लक्ष्मी  पूजन, कुबेर पूजन, अपने आश्रितों को मिठाई आदि बांटना तथा धर्मस्थलो पर दानादि करना कल्याणकारी होगा।

निशीथ काल मे मंत्र जाप , विधि विधान से धन लक्ष्मी का आहवाहन एवं पूजन , गल्ले की पूजा तथा हवन इत्यादि कार्य सम्पूर्ण कर लेना चाहिए.


 दीपावली पूजन महानिशीथकाल में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, जिसमें पूजन शास्तरोक्त विधि अनुसार करना अनिवार्य है। महानिशीथ काल में इष्ट देव का ध्यान , गुरु मंत्र का जाप और तंत्र साधना करनी चाहिए.


Deepawali - 26 October 2011. Day- Wednesday
Nakshatra- Chitra in day, After Pradosh kaal it will be Swati nakshatra
Pradosh time - 17:42 - 20:18
Special Pradosh time - 18:46 - 20:41
Nisheeth kaal - 20:18 - 22:54
Amrit Choughadia - 20:58 - 22:36
Maha nishith kaal - 22:54 - 25:30
Time between 22:55 - 25:18 will have cancer ascendent and it is very important for mansik jaap (mental chanting of Mantra)  


All preparations of temple related to Puja, Rangoli, Deepdan etc should be done during Pradosh Kal. Additionally, it is considered auspicious to complete the work of sweets distribution during this time.


Also, the work of drawing of Swastika and writing Shub Labh on the doors should be done in this Muhurat time. Besides this, giving gift to the elders of the family and taking their blessings increases the auspiciousness in a person’s life. Giving donations etc. at religious places during this period is considered favorable.

Calling and worshipping Dhan Lakshmi, Havan etc should be completed during this time. Apart from this, Maha Lakshmi Pujan, Maha Kali Pujan, writing, Kuber Pujan and chanting of mantra should be done during this time.

During this time basically, Tantric work, astrological knowledge, rituals, worshiping of powers is performed and calling other powers is considered auspicious.